ହାତୀ ଗୁମ୍ଫା ଶିଳାଲେଖ (ଭାଗ-୫)

ଉଦୟଗିରିର ହାତୀଗୁମ୍ଫାରେ ୧୭ ଧାଡ଼ିର ଏକ ଶିଳାଲେଖ ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଥାଏ ଯାହାକି ପାଲି ଭାଷାରେ ବର୍ଣ୍ଣିତ ତଥା ବ୍ରାହ୍ମୀ ଲିପିରେ ଖୋଦିତ । ଏହା ସିଧାସଳଖ ୬ ମାଇଲ ଦୂରରେ ଅବସ୍ଥିତ ଧଉଳି ଆଡ଼କୁ ମୁହଁ କରି ରହିଛି ଯେଉଁଠି ଅଶୋକଙ୍କ ଶିଳାଲେଖ ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଥାଏ । ସାଙ୍କେତିକ ଭାବେ ଏହା ମଗଧ ସାମ୍ରାଜ୍ୟ ଉପରେ କଳିଙ୍ଗ ସାମ୍ରାଜ୍ୟର ପୁନଃସ୍ଥାପିତ ଶ୍ରେଷ୍ଠତ୍ୱକୁ ବୁଝାଇଥାଏ । ଏଠାରେ ଉଲ୍ଲେଖଯୋଗ୍ୟ ଯେ ଅଶୋକଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ ଏକଦା ମଗଧ ସୈନ୍ୟବାହିନୀ କଳିଙ୍ଗକୁ ଭୟାବହ ଯୁଦ୍ଧରେ ପରାସ୍ତ କରି ଏହା ଉପରେ ଆଧିପତ୍ୟ ବିସ୍ତାର କରିଥିଲା, ମାତ୍ର ଅନେକ ଦଶନ୍ଧି ପରେ ମହାରାଜା ଖାରବେଳଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ କଳିଙ୍ଗ ସୈନ୍ୟବାହିନୀ ମଗଧ ଉପରେ ପୁନଃ ନିଜର ଶ୍ରେଷ୍ଠତ୍ୱ ପ୍ରତିପାଦନ କରି ନିଜର ହୃତଗୌରବ ଫେରିପାଇଥିଲା ।
ଏହି ଶିଳାଲେଖ ବିଭିନ୍ନ ଗବେଷକଙ୍କ ମତରେ ମହାରାଜା ଖାରବେଳଙ୍କ ରାଜତ୍ୱର ତ୍ରୟୋଦଶ ବର୍ଷରେ ତଥା ଖ୍ରୀଷ୍ଟପୂର୍ବ ୨ୟ ଶତାବ୍ଦୀରୁ ଖ୍ରୀଷ୍ଟାବ୍ଦ ୧ମ ଶତାବ୍ଦୀ ମଧ୍ୟରେ ଖୋଦିତ ବୋଲି ଅନୁମାନ କରାଯାଏ । ଏହା ମହାରାଜା ଖାରବେଳଙ୍କ ଉପରେ ଉପଲବ୍ଧ ତଥ୍ୟଗୁଡିକର ମୁଖ୍ୟ ଆଧାର ।
ଶିଳାଲେଖ –
୧୪ଶ ଧାଡ଼ି (ମୂଳ ପାଲି)
… [क] तुं जठर [ल]खिल गोपुराणि सिहराणि निबेसयति सत बिसिकनं परिहारे हि [।।] अभुत मछरियं च हथीनाब [तं] परिहर [उपलभते] हय हथी रतन [मा]निकं [।।] पंडराजा एदानि अनेकानि मुत मनिरतनानि आहारापयति इध सतस[हसानि]
୧୪ଶ ଧାଡ଼ି (ସଂସ୍କୃତ ଅନୁବାଦ)
… कर्त्तुं दृढ़ लक्ष्मील गोपुराणि शिखराणि निबेशयति शतविंशकानां (मुद्राणां) परिहारैः ।। अद्भुतं आश्चर्यं च तद् हस्ती-नावं परिहृत्य (उपलव्धं) हय-हस्ती-रत्न-माणिक्यं ।। पाण्ड्यराजा इदानीं अनेकानि मुक्ता, मणि, रत्नानि शतसहस्राणि इह आहारयति ।।

୧୫ଶ ଧାଡ଼ି (ମୂଳ ପାଲି)
… सकत समण सुबिहितानं च सब दिसानं यतिनं तपस इसिनं संघायनं अरहत निसीदिया समीपे पभारे बराकर समुथापिताहि अनेक योजनाहि ताहि [पनतिसाहि सतसहसेहि] सिलाहि सिहपथ राज्ञि स [भिलासेहि]
୧୫ଶ-୧୬ଶ ଧାଡ଼ି (ସଂସ୍କୃତ ଅନୁବାଦ)
सिंहपथ राज्ञाः (अभिलाषेन) सकृत श्रमण सुविहितार्थं च सर्वदिग्य्यः (आगन्तुकानां) यतिनां तपस्वी ऋषिणां संघियानां (निमित्तार्थं) अर्हन्निषिदन समीपे प्राग्भागे वराकर समुत्थापिताभिः अनेक योजनात् (आनीताभिः) ताभिः पंचत्रिंशत् शत सहस्रैः शिलाभिः … पाटलचत्वरे च बैदुर्य्य गर्भान् स्तंभान् प्रतिस्थापयति पंचोत्तर शत सहस्रैः (मुद्राभिः) ।।
मौर्य्यकाल व्यवच्छिन्नं च चतुः षष्ठ्यंग (कला) सम्मितं तौर्य्यत्रिकं उत्पादयति ।।

୧୬ଶ ଧାଡ଼ି (ମୂଳ ପାଲି)
… पटलिक चतरे च बेडुरिय गभे थंभे पटिथापयति पानतरिय सतसहसेहि [।।] मुरिय काल बोछिनं च चोयठि अंग संतिकं तुरियं उपादयति [।।] खेमराजा स बढ़राजा स भिखुराजा धमराजा पसंतो सुनं तो अनुभबं तो कलणानि
୧୭ଶ ଧାଡ଼ି (ମୂଳ ପାଲି)
… गुणबिसेस कुसलो सब पासंड़पूजको सबदेबायतन संकार कारको अपतिहत चक बाहन बलो चकधरो गुतचको पबत चको राजसि बसुकुल बिनिसितो महाबिजयो राजा खारबेल सिरि [।।]
୧୬ଶ-୧୭ଶ ଧାଡ଼ି (ସଂସ୍କୃତ ଅନୁବାଦ)
क्षेमराजा सः भिक्षुराजा धर्मराजा … गुण विशेष कुशलः सर्व पार्षद पूजकः सर्वदेवायतन संस्कार कारकः अप्रतिहत चक्र वाहिनी वलः चक्रधरः गुप्तचक्रः प्रवृत्त चक्रः राजर्षि वसु कुल विनिसृतः महाविजयः राजा श्री खारबेलः (प्रशासति) पश्यन् श्रुण्वन् अनुभवन् कल्याणानि ।।


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